अँखियों में समन्दर

दिल दरिया है तेरा
तो मेरा भी कोई सरोवर नहीं।
झाँक के देखो तो
इन अँखियों में समन्दर मिलेगा।।

Comments

6 responses to “अँखियों में समन्दर”

  1. अतिसुन्दर

  2. Geeta kumari

    वाह वाह कविता में भी सागर जितनी गहराई । बहुत ख़ूब भाई जी

  3. Satish Pandey

    कवि “शास्त्री” जी द्वारा प्रस्तुत यह शायरी स्वयं के दिल को दरिया की तरह बड़ा कहने वाले सहृदय को चुनौती दे रही है । ये पंक्तियाँ पाठक के दिल की धड़कन बढ़ाने और उसे थामने पर आमादा प्रतीत होती हैं। तत्सम शब्द व जनप्रचलित शब्दों का उचित तालमेल है। भाव प्रधान पंक्तियाँ हैं। बहुत खूब

    1. बहुत बहुत धन्यवाद

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