आपकी मुस्कुराहट है
अंधेरे में उजाले सी,
बिलखती भूख में पाये
उदर के लघु निवाले सी।
मिटाती मानसिक पीड़ा,
उगाती कुछ सुकूँ के पल,
यही तो है दवा मन की
यही दुश्वारियों का हल।
अंधेरे में उजाले सी
Comments
5 responses to “अंधेरे में उजाले सी”
-
मिटाती मानसिक पीड़ा,
उगाती कुछ सुकूँ के पल,
यही तो है दवा मन की
यही दुश्वारियों का हल।
__________किसी अपने के सुंदर साथ के बारे में बताती कवि सतीश जी की बहुत ही सुन्दर कविता। बहुत ख़ूब, लाजवाब अभिव्यक्ति। -

बहुत सुंदर कविता वाह
-

Very nice
-

Very beautiful
-
बहुत खूब
Leave a Reply
You must be logged in to post a comment.