अजब-गजब से लोग

अजब-गजब से लोग हैं!
ना जाने क्यों इंसानियत से
इतना जलते लोग हैं
कुछ होश में हैं तो कुछ बेहोश हैं।
मगर कुछ मगरूर होकर
अपनी ही धुन में बेहोश हैं।

Comments

10 responses to “अजब-गजब से लोग”

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    1. मोहन सिंह मानुष Avatar

      मास्टर जी ! सत्य वचन।
      सही कहा है आपने अभिषेक जी को बधाई!🙏👌

      1. मैं नाचीज हूं अभी तो सीख रहा हूं मैं कोई कवि नहीं हूं

  2. Geeta kumari

    Nice lines 👌

  3. मैं भी मास्टरजी से सहमत हूँ ।

    1. अरे ये तो आप सभी का बड़प्पन है मैं कुछ भी नहीं हूँ

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