अजब-गजब से लोग हैं!
ना जाने क्यों इंसानियत से
इतना जलते लोग हैं
कुछ होश में हैं तो कुछ बेहोश हैं।
मगर कुछ मगरूर होकर
अपनी ही धुन में बेहोश हैं।
अजब-गजब से लोग
Comments
10 responses to “अजब-गजब से लोग”
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वाह
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धन्यवाद
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मास्टर जी ! सत्य वचन।
सही कहा है आपने अभिषेक जी को बधाई!🙏👌-
मैं नाचीज हूं अभी तो सीख रहा हूं मैं कोई कवि नहीं हूं
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Nice lines 👌
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धन्यवाद
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मैं भी मास्टरजी से सहमत हूँ ।
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अरे ये तो आप सभी का बड़प्पन है मैं कुछ भी नहीं हूँ
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वाह वाह
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