अज्ञानता का मिटा अंधेरा
ज्ञान की ज्योत जलाते हैं
अथाह शब्दों का भंडार लिए
जीवन पथ सुगम बनाते हैं
बाधाओं से पार कराते
ज्ञान का चक्षु खुलवाते हैं
प्रतिदिन विद्यालय में आकर
नित नवीनता से मिलाते हैं
कभी विनम्र ,कभी दृढ़ता से
प्रकाश ही प्रकाश फैलाते हैं
चारों धर्मों की एकता की शक्ति को
छात्रों के अंतर्मन, पहुँचाते हैं
कभी मित्रवत व्यवहार वो करके
कभी माँ की ममता से मिल जाते हैं
सर्वश्व निछावर कर देते हैं
उज्जवल भविष्य बनाते हैं
ऐसे हमारे शिक्षक शिक्षिका को
शत बार नमन हम दोहराते हैं
शत बार नमन हम दोहराते हैं।।
अज्ञानता का मिटा अंधेरा
Comments
16 responses to “अज्ञानता का मिटा अंधेरा”
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सुंदर रचना
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Dhanyvaad sir
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बहोत ही सुंदर लाइनें हैं।
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Nice
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Nice lines
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Thank u so much
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Ati uttam
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😊😊Mast 👌👌👌👌✌✌
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Are waah bdiya
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very nice
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Wao ye hui na bat…….bohit badhiya.
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Wahh
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वाह G
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Nice poem
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वाह बहुत सुंदर
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Good
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