12 Comments

  1. ”विनयचंद ‘ ये नारी है
    ममता की अवतारी है।।
    त्याग बलिदान की मूरत है ।
    सम्मान की इन्हें जरुरत है ।”
    बहुत ही बेहतरीन अभिव्यक्ति है शास्त्री जी, सुन्दर भावाभिव्यक्ति, लाजवाब शिल्प। कथ्य को पाठक तक संप्रेषित करने में पूर्णतः सफल है यह रचना। लेखनी को सादर अभिवादन।

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