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  1. “घर में चूल्हा जले दो वक्त,
    वो अपना खून जलाता है
    अपना ना कोई ठौर-ठिकाना
    दूजे का भवन बनाता है”
    —- बहुत खूब, मेहनतकश मजदूर की मेहनत का भावपूर्ण चित्रण करने में कवि ने सफलता प्राप्त की है। मजबूत भावपक्ष के साथ सुन्दर कविता का सृजन हुआ है।

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