जाने क्या सोंचती रहती हूँ
बस उसके ही खयालों में
खोई रहती हूँ
जिन्दगी अब फुर्सत कहाँ
देती है
अपनी उलझनों में ही उलझी
रहती हूँ…
अब फुर्सत कहाँ
Comments
6 responses to “अब फुर्सत कहाँ”
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वक्त का तकाजा है।
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लाजवाब👌
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बहुत खूब
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सुन्दर पंक्तियां
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अतिसुंदर
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सुन्दर
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