अब फुर्सत कहाँ

जाने क्या सोंचती रहती हूँ
बस उसके ही खयालों में
खोई रहती हूँ
जिन्दगी अब फुर्सत कहाँ
देती है
अपनी उलझनों में ही उलझी
रहती हूँ…

Comments

6 responses to “अब फुर्सत कहाँ”

  1. Praduman Amit

    वक्त का तकाजा है।

  2. Geeta kumari

    सुन्दर पंक्तियां

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