“बाँहों का हार”

दीदार करके उसका
मैं पाक हो गई
मेरी मोहब्बत से
जिन्दगी आबाद हो गई
करता रहा वो
मेरे इजहार का इन्तजार
पर
मैं किसी और की बाँहों का हार हो गई..!!

Comments

13 responses to ““बाँहों का हार””

  1. Praduman Amit

    वाह क्या मुहब्बत है। किसी की बाहों के हार। बहुत ही दिलकश अंदाज है।

  2. प्रज्ञा जी अति सुंदर रचना❤

  3. Geeta kumari

    बहुत ख़ूब

  4. कवि प्रज्ञा जी की सुन्दर भावों से सजी सुन्दर रचना है यह

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