अभिवादन सम्मान

निद्रा में था रात भर, उठूँ धरूँ अब ध्यान,
मात-पिता गुरु देव का, अभिवादन सम्मान,
अभिवादन सम्मान, बड़ों का करूँ पूज लूँ,
ले उनसे आशीष, राह में कदम बढ़ा लूँ।
कहे कलम आशीष, एक अनमोल है मुद्रा,
उसे पास रख कदम बढ़ा तू त्याग दे निद्रा।

Comments

7 responses to “अभिवादन सम्मान”

  1. बहुत खूब, अति उत्तम रचना

  2. Geeta kumari

    कहे कलम आशीष, एक अनमोल है मुद्रा,
    उसे पास रख कदम बढ़ा तू त्याग दे निद्रा
    ________ कवि सतीश जी को छंद शैली में लिखी हुई एक अनमोल रचना, सच ही तो है आशीर्वाद से बढ़कर कोई मुद्रा नहीं है, बहुत सुंदर विचार प्रस्तुत करती हुई लाजवाब अभिव्यक्ति,उत्तम शिल्प, शानदार लेखन,लेखनी को अभिवादन

  3. वाह वाह अति उत्तम पाण्डेय जी

  4. निद्रा में था रात भर, उठूँ धरूँ अब ध्यान,
    मात-पिता गुरु देव का, अभिवादन सम्मान,
    अभिवादन सम्मान, बड़ों का करूँ पूज लूँ,
    ले उनसे आशीष, राह में कदम बढ़ा लूँ।

    माता पिता तथा गुरुजनों का आशीर्वाद पाने को उत्सुक कविता

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