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  1. कान्हा जी का होली खेलने का सुंदर चित्रण प्रस्तुत करती हुई कवि की बहुत सुंदर रचना

  2. भोजपुरी पूर्वी होली गीत- कान्हा मारे पिचकरिया |
    कान्हा मारे पिचकरिया ये सखिया
    बदनवा भिंजेला मोर
    कन्हईया जी खेले ले होरिया
    चुनरिया रंगी देले मोर |

    कान्हा और गोपियों के होली खेलने के प्रसंग को कविता मे पिरोकर
    आनन्द की अनुभूति कराती रचना

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