अरे, न हो, इतना निराश तू

अरे, न हो, इतना निराश तू
बाधाएं आती रहती हैं,
मगर हौसले रहें बुलंद तो
खुशियां कदम चूमा करती हैं।
असफलताओं से मत घबरा
सच्ची में तू मेहनत कर ले,
सच्चाई पर विश्वास जगा
बाकी से अब दूरी रख ले।

Comments

4 responses to “अरे, न हो, इतना निराश तू”

  1. वाह सर वाह, बहुत खूब

  2. Geeta kumari

    कवि सतीश जी की , असफलतओं से सफलता की ओर कदम ले जाती हुई बहुत ही शानदार रचना . मेहनत करने की प्रेरणा देती हुई सकारात्मक दृष्टिकोण से परिपूर्ण अति सुन्दर कविता और उसकी सुंदर प्रस्तुति. लेखनी की प्रखरता को अभिवादन .

  3. बहुत सुंदर पंक्तियाँ वाह

  4. वाह , बहुत ही बढ़िया

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