असहायों की मदद को
उठो, रुको मत, उठो
उठो ना,
जो असहाय हैं, जिनका कोई सहारा नहीं
उन्हें तुम सहारा दो।
जो डूब रहे हैं
उन्हें किनारा दो।
उठो, सोचो मत, उठो
तुम मदद कर सकते हो,
जगाओ अपने भीतर का मानव,
जगाओ, रुको मत, जगाओ
जगाओ ना,
अन्धकार में दीपक जगाओ ना।
तुम नहीं तो
कौन करेगा उजाला।
तुम्हारे पास तेल भी है
बाती भी है,
बचाकर क्या करोगे
जला दो ना।
आज वे असहाय हैं
उनके पास न तेल है न बाती है,
क्या पता कल उनका
सूरज भी उग जाए
आज तुम उजाला दिखा दो ना,
दो रोटी खिला दो ना,
खिला दो, रुको मत, खिला दो
खिला दो ना,
जो भूखे हैं उन्हें
दो रोटी खिला दो ना।
—— डॉ. सतीश पांडेय
असहायों की मदद को उठो
Comments
8 responses to “असहायों की मदद को उठो”
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असहायों के लिए मन में करूणा का भाव जगाने वाली सुंदर रचना
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बहुत बहुत धन्यवाद गीता जी
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बहुत सुन्दर भाव प्रस्तुति।
उचित आह्वान। परोपकारः सतां विभूतयः की पुष्टि आपकी रचना में है।।-
सादर आभार शास्त्री जी
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बहुत खूब
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Thank you
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क्या बात है
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Thanks
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