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  1. समय बड़ा हीं
    होता जग में सदा से असामान्य।।
    टिक – टिक करती सूई वाली।
    अपने हीं चाल में चलने वाली।।
    __________ समय और घड़ी पर कवि विनय चंद शास्त्री जी की अति उत्तम और सुंदर रचना

  2. घड़ी तो घड़ी है
    साधारण हो या फिर असामान्य।
    पर समय बड़ा हीं
    होता जग में सदा से असामान्य।।
    टिक – टिक करती सूई वाली।
    अपने हीं चाल में चलने वाली।।

    समय का पहिया घूमता रहता है समान्य गति से फिर चाहे किसी का समय बदले या ना बदले

    सुंदर तथा विचारणीय रचना

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