आँसू

आज पुष्प सुगंध फैला जा
कल मंदिर में चढ़ना है
अरे तुझे इस बाग़ में अपनी
छाप छोड़कर जाना है,
ताकि विदाई के मौके पर
अन्तस् से निकले आंसू
रोक न पाए खोटी कविता
धरा भिगो देवें आँसू।

Comments

7 responses to “आँसू”

  1. MS Lohaghat

    वाह बहुत खूब

    1. Satish Pandey

      धन्यवाद जी

  2. तंज कसती हुई कविता सुंदर है

    1. धन्यवाद जी

  3. Geeta kumari

    वाह, बहुत ख़ूब

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