उनकी आंखों में मुहब्बत
का जल है।
हमने समझा था बस वो
काजल है।
यकीन मानिए कि
इस तरह कभी हमने
उनकी आंखों की तरफ
गौर से देखा भी न था।
इस कदर मानता होगा हमको
हमने सच में कभी
इस बात को सोचा भी न था।
आंखों में मुहब्बत
Comments
18 responses to “आंखों में मुहब्बत”
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बहुत बढ़िया श्रृंगार से भरी
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Thank you
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Very very nice lines
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Thank yout ji
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अतिसुंदर भाव
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सादर धन्यवाद
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बहुत सुन्दर कविता है सर, लयबद्धता और श्रृंगार से भरी हुई है।
“मुहब्बत का जल, और समझा था काजल” .. यमक़ अलंकार की सहज और सुन्दर प्रस्तुति आपकी लेखनी की विलक्षणता को दर्शाती है ।
आपकी लेखनी को अभिवादन है सतीश जी ..-
इस बेहतरीन समीक्षा हेतु धन्यवाद शब्द भी नाकाफी है। आपके द्वारा किये गए उत्साहवर्धन हेतु सादर अभिवादन।
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बहुत ही सुन्दर भाव से प्रेरित रचना है।
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बहुत बहुत धन्यवाद
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Beautiful
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सादर धन्यवाद
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Bahut khoob
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सादर धन्यवाद जी
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वाह वाह बहुत खूब पांडेय जी
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बहुत धन्यवाद जी
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बहुत सुंदर
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आभार
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