आंखों में मुहब्बत

उनकी आंखों में मुहब्बत
का जल है।
हमने समझा था बस वो
काजल है।
यकीन मानिए कि
इस तरह कभी हमने
उनकी आंखों की तरफ
गौर से देखा भी न था।
इस कदर मानता होगा हमको
हमने सच में कभी
इस बात को सोचा भी न था।

Comments

18 responses to “आंखों में मुहब्बत”

  1. बहुत बढ़िया श्रृंगार से भरी

    1. Satish Pandey

      Thank you

    1. Satish Pandey

      Thank yout ji

    1. Satish Pandey

      सादर धन्यवाद

  2. Geeta kumari

    बहुत सुन्दर कविता है सर, लयबद्धता और श्रृंगार से भरी हुई है।
    “मुहब्बत का जल, और समझा था काजल” .. यमक़ अलंकार की सहज और सुन्दर प्रस्तुति आपकी लेखनी की विलक्षणता को दर्शाती है ।
    आपकी लेखनी को अभिवादन है सतीश जी ..

    1. Satish Pandey

      इस बेहतरीन समीक्षा हेतु धन्यवाद शब्द भी नाकाफी है। आपके द्वारा किये गए उत्साहवर्धन हेतु सादर अभिवादन।

  3. Praduman Amit

    बहुत ही सुन्दर भाव से प्रेरित रचना है।

    1. Satish Pandey

      बहुत बहुत धन्यवाद

    1. Satish Pandey

      सादर धन्यवाद

    1. Satish Pandey

      सादर धन्यवाद जी

  4. Shyam Kunvar Bharti

    वाह वाह बहुत खूब पांडेय जी

    1. Satish Pandey

      बहुत धन्यवाद जी

    1. Satish Pandey

      आभार

Leave a Reply

New Report

Close