आंसू ठहरे थे

आंसू ठहरे थे उनकी पलकों पर ,
मगर गिरना नहीं चाहते थे ,
भीतर उठा था तूफान,
पर बहना नहीं चाहते थे।

Comments

12 responses to “आंसू ठहरे थे”

  1. हृदय की वेदना को व्यक्त सुन्दर पंक्तियां

    1. बहुत बहुत धन्यवाद प्रज्ञा मैम

      1. इतनी औपचारिकता क्यों प्रतिमा?
        आप मुझे अपना ही समझकर बात करो मैम ना बोलो…

      2. जी बिल्कुल😊 मगर उसके लिए अनौपचारिक भी होना जरूरी है चलो शुरुआत हम करते हैं! फ्रेंड रिक्वेस्ट भेज कर!

  2. Geeta kumari

    वाह, क्या बात है

    1. बहुत बहुत धन्यवाद 🙏

  3. मोहन सिंह मानुष Avatar

    बहुत सुंदर पंक्तियां

  4. Pratima chaudhary

    धन्यवाद सर

  5. Deep

    न जाने कौन सा आँसू मेरा राज़ खोल दे,
    हम इस ख़्याल से नज़रें झुकाए बैठे हैं।

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