आंसू ठहरे थे उनकी पलकों पर ,
मगर गिरना नहीं चाहते थे ,
भीतर उठा था तूफान,
पर बहना नहीं चाहते थे।
आंसू ठहरे थे
Comments
12 responses to “आंसू ठहरे थे”
-

हृदय की वेदना को व्यक्त सुन्दर पंक्तियां
-

बहुत बहुत धन्यवाद प्रज्ञा मैम
-

इतनी औपचारिकता क्यों प्रतिमा?
आप मुझे अपना ही समझकर बात करो मैम ना बोलो… -

जी बिल्कुल😊 मगर उसके लिए अनौपचारिक भी होना जरूरी है चलो शुरुआत हम करते हैं! फ्रेंड रिक्वेस्ट भेज कर!
-
-
-
वाह, क्या बात है
-

बहुत बहुत धन्यवाद 🙏
-
-
सुंदर
-

धन्यवाद सर
-
-

बहुत सुंदर पंक्तियां
-

धन्यवाद सर
-
न जाने कौन सा आँसू मेरा राज़ खोल दे,
हम इस ख़्याल से नज़रें झुकाए बैठे हैं।-

धन्यवाद
-
Leave a Reply
You must be logged in to post a comment.