आईना

देखता हूँ मैं जब भी आईना
महसूस करता हूँ,
कमी खुद मुझ में है
तुझको यूँ ही बदनाम करता हूँ।

Comments

23 responses to “आईना”

  1. सुन्दर अभिव्यक्ति, स्वयं की कमी महसूस करना स्वयं को ठीक करने की ओर प्रथम कदम है।…. बहुत सुंदर

    1. बहुत सारा धन्यवाद, आपकी बहुमूल्य टिप्पणी और समीक्षा निश्चित तौर पर मार्गदर्शक है, सादर अभिवादन

      1. Geeta kumari

        🙏🙏

  2. Wow, kya baat hai, very nice

    1. बहुत बहुत धन्यवाद जी, यूँ ही हौसलाअफजाई करते रहें

  3. काबिले तारीफ पंक्तियां

    1. बहुत बहुत धन्यवाद ऋषि जी

    1. सादर धन्यवाद शास्त्री जी

    1. सादर धन्यवाद

  4. बहुत सुंदर पंक्तियां

    1. Satish Pandey

      सादर धन्यवाद

  5. बहुत सुन्दर

    1. बहुत बहुत धन्यवाद

  6. सुन्दर अभिव्यक्ति

    1. आपको बहुत बहुत धन्यवाद

  7. सादर अभिवादन इन पंक्तियों पर

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