आओ दो बोल सुना जाओ ना

आओ दो बोल
सुना जाओ ना,
गीत के बोल
सुना जाओ ना।
हो गए दिन बहुत
सुना ही नहीं,
अपने उदगार
सुना जाओ ना।
सूनी सूनी सी फिजायें हैं अब
सारी मुरझाई दिशाएं हैं अब,
वो घनी रात थी वो बीत गई
वो कड़ी धूप थी जो बीत गई,
अब तो बारिश जरा सा होने लगी,
आपके बिन हँसी भी रोने लगी,
थाम लो आप अब कलेजे को
आओ दो बोल सुना जाओ ना
अपने उदगार सुना जाओ ना।

Comments

10 responses to “आओ दो बोल सुना जाओ ना”

  1. सुमधुर रचना

    1. धन्यवाद चंद्रा जी

  2. बहुत खूब

    1. बहुत बहुत धन्यवाद

  3. बहुत धन्यवाद

  4. Praduman Amit

    बहुत ही सुन्दर।

    1. बहुत धन्यवाद

  5. कोमल भावनाओं को व्यक्त करती हुई अति सुन्दर और सुमधुर रचना

  6. Sandeep Kala

    सुन्दर रचना

Leave a Reply

New Report

Close