आखिर संतोंं को मारा क्यो?

तुम कुछ बोलो ना बोलो, पर मुद्दे सारे सुलझ गए,
सुनो देश के ग़द्दारों तुम गलत जगह पर उलझ गए ।

है तकलीफ तुम्हे ये के ‘अर्णब’ ने चिट्ठा खोल दिया,
जो दूजा ना कह पाया उसने ये कैसे बोल दिया ।

देश का बेड़ा गर्क किया अब जा विपक्ष में बैठे हो,
कोई कसर ना छोड़ी है जब भी समक्ष में बैठे हो ।

ये कहता इतिहास सहिष्णु होकर हिन्दू ठगा गया,
पहली दफा हुआ कोई इस तरह हिन्दू जगा गया ।

आज देश का हिन्दू जब संतों की खातिर खड़ा हुआ,
न्याय की ज़िद में काशी और मठ, है ‘प्रयाग’ भी अड़ा हुआ ।

बेगुनाह संतों पर यूँ अपनी रंजिश को उतारा क्यों ?
है हिंदुत्व का प्रश्न यही आखिर संतों को मारा क्यों ?

#पालघर

– प्रयाग धर्मानी

Comments

10 responses to “आखिर संतोंं को मारा क्यो?”

  1. Geeta kumari

    वाह, यथार्थ चित्रण

    1. शुक्रिया जी

  2. बहुत खूब, वाह

  3. पूर्ण सत्य

    1. धन्यवाद आपका

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