आज नजदीक से देखा उनको

आज नजदीक से देखा उनको
तब से मन में बदल गया सब कुछ,
हम तो कुछ और ही सोचे थे मगर
उनमें कुछ और ही मिला।
हम तो समझे थे वे बड़े वो हैं
मगर नजदीक से देखी सूरत,
वे तो हैं नेह की खिलती मूरत
उनमें सब कुछ सरल ही मिला।

Comments

18 responses to “आज नजदीक से देखा उनको”

    1. Satish Pandey

      Thank you

    1. Satish Pandey

      Thank you ji

  1. बहुत सुन्दर

    1. Satish Pandey

      बहुत बहुत धन्यवाद

  2. अकसर यही होता आया है

    1. Satish Pandey

      Thanks जी

  3. Geeta kumari

    बहुत खूबसूरत रचना है सतीश जी। कवि ने मन के भावों का अति सुंदरता से वर्णन किया है ।लेखनी की प्रखरता की जितनी तारीफ करें उतनी काम है। लेखनी को प्रणाम ।

    1. Satish Pandey

      आपकी समीक्षा प्रेरणादायक है। भावों पर इतनी सुंदर पकड़ एक सुलझे हुए कवि की लेखनी ही कर सकती है। बहुत बहुत धन्यवाद गीता जी।

    1. Satish Pandey

      सादर नमस्कार, धन्यवाद

    1. Satish Pandey

      Thank you ji

    1. Satish Pandey

      बहुत बहुत धन्यवाद प्रज्ञा जी

  4. MS Lohaghat

    बहुत बढ़िया

    1. Satish Pandey

      बहुत बहुत धन्यवाद जी

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