आज पहली बार

हंसता चहरा रो दिया,
आचंल पूरा भीगो दिया,
आज पहली बार।
बन्जर है अब दिल की जमीं,
शायद कुछ थी हम में ही कमी,
मायूस दिल है रो दिया,
लगता कुछ है खो दिया,
आज पहली बार……….।

Comments

8 responses to “आज पहली बार”

  1. Antariksha Saha Avatar
    Antariksha Saha

    बहुत खूब भईया

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar
      मोहन सिंह मानुष

      बहुत बहुत आभार व अभिनन्दन सर 🙏

  2. हँसता चेहरा
    आंचल।
    अपनी वेदना को व्यक्त करने के लिए सुंदर शब्दों का प्रयोग

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar

      बहुत बहुत आभार सर
      कोई तरीका है सर अब ये गलतियां सुधारने का,
      कृपया मार्गदर्शन करें

      1. सर मैं तो एक काम करता हूँ
        कविता लिखकर एक बार पढ़ लेता हूँ।
        यदि फिर भी गलती रह जाती है तो
        त्रुटिपूर्ण कविता को डिलीट करके कॉपी पेस्ट करके दोबारा पोस्ट कर देता हूं

  3. लोग चाहते हैं की मैं बस झूठी तारीफ ही करता जाऊं परंतु इससे मेरा कोई नुकसान नहीं होगा।
    मुझे तो पॉइंट मिल ही जाएंगे चाहे जो कुछ भी लिखूँ इससे
    औरों का ही फायदा है उनकी त्रुटियों में सुधार आता है तथा वह कुछ सीखते हैं वह सिखाते हैं।
    क्योंकि साहित्य सृजन में यह बहुत आवश्यक है कि हम समाज से सीखें और सिखाएं।

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar
      मोहन सिंह मानुष

      कोई बात नहीं सर! आप अपने मन से जो सही लगता है वह करते रहो। झूठी तारीफ दूसरे के लिए नुकसानदायक तो होती है ही, खुद के लिए भी होती है।

  4. अतिसुंदर रचना

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