“आत्मीयता का अभाव”
प्यार के हजारों रंग देखे
मगर उन सभी रंगों में
आत्मीयता का अभाव ही मिलता है
लौटकर फिर
तुम्हारे पास आ जाती हूँ
फिर से उलझ जाती हूँ मैं
बातों के जंजाल में,
दुनिया के अनसुलझे प्रपंच में,
ना पूरी हो सकने वाली अकाक्षाओं में….
और बटोरने लग जाती हूँ
दर्द, सिस्कियां, वैमनस्य भरे चेहरों की परछाईयां !!
प्रेम पर आधारित बहुत सुंदर रचना
धन्यवाद
बहुत खूब
धन्यवाद
सुन्दर अभिव्यक्ति
धन्यवाद
Beautiful
Tq