आपकी निगाहों में

आपकी निगाहों में
इस कदर नशा देखा,
भरी हो जैसे कोई
तेज, तीखी हाला।
हम तो हाला कभी
सूँघते तक नहीं थे,
और खूबसूरती पर
लिखते नहीं थे,
मगर क्यों हुआ
देखने में नशा सा,
मन क्यों लगा
इस तरफ यूँ खिंचा सा।
चलो जाने दो,
अब न देखो इधर तुम,
नहीं झेल पायेंगे
नैन का नशा हम।

Comments

9 responses to “आपकी निगाहों में”

  1. मैंने कब कहा उनकी आँखें नशीली हैं
    हया को भूल जब मेरे नजदीक वो आए

    नजर से नजर जो मिली
    लगा थोड़ी-सी पी ली है…

    बहुत खूब

    1. वाह प्रज्ञा जी, बहुत खूब इतनी सुंदर टिप्पणी वाह
      बहुत बहुत धन्यवाद

    2. This comment is currently unavailable

  2. बहुत खूब सर

  3. बहुत ही खूबसूरत पंक्तियाँ

  4. Geeta kumari

    Very beautiful love poem written by poet Satish ji,and he beautifully expressed his feelings.Very pretty poem.There is UPMA ALANKAR ALSO, inhance its beauty.

  5. Geeta kumari

    “Enhance its beauty”** typing mistake.

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