आवरण की आभा

लट के श्याम उलझे
केशों की वो चमक अब,
नैनों की नीलिमा अब
होंठों की लालिमा अब,
पतली सी वो कमर अब
बाली सी वो उमर अब
तोते सी नासिका अब
पाने की लालसा अब,
मेरी कलम के विषयों से
दूर हो रही है,
यह आवरण की आभा पे
मौन हो रही है।

Comments

12 responses to “आवरण की आभा”

  1. वाह क्या बात है

    आवरण की आभा 👌👌👌

    1. सादर धन्यवाद

  2. Neelam Tyagi Avatar
    Neelam Tyagi

    बहुत खूब

    1. Satish Pandey

      सादर आभार

    1. Satish Pandey

      धन्यवाद जी

  3. Geeta kumari

    बहुत सुंदर…

    1. Satish Pandey

      बहुत बहुत आभार

  4. बहुत ही शानदार

  5. Kumar Piyush

    waah

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