अब छोड़ चले हम परदेश ।
जब से लगी किस्मत में ठेस ।।
घर परिवार में मिल जायेंगे ।
वहीं पे रूखी सुखी खायेंगे।।
एक तरफ करोना के शैलाब ।
दूसरे तरफ मौत के शैलाब ।।
कहीं काल हमें निगल न ले ।
क्यों न इससे पहले लौट चले। ।
जान है तो ए सारा जहान है ।
यहाँ सब अपनो में परेशान है ।।
मास्क लगाये दिल घबड़ाए ।
देखो सब अपनो से दूरी बनाए। ।
सारे काम काज हो गए बंद ।
करोना जो दिखाया अपना रंग ।।
न मिला सहारा न मिला दाना पानी ।
यही है प्रवासी मजदूर की कहानी।।
आ अब लौट चले
Comments
5 responses to “आ अब लौट चले”
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Good
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Nice
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वाह
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👌
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👍👍
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