आ के मिल

कोई जब जाता है, दूर कहीं,
यादें छोड़ जाता है, पास यहीं।
उससे कहो अपनी यादों से तो आ के मिल,
एक बार ही सही, फिर पहले सा आ के खिल।
यूं ही आजा एक बार कभी,
अच्छा, फिर से लौट जाने के लिए ही मिल,
तू ना आएगा, तो हम चले आएंगे, तेरे दर पे
चल ये ही सही,
बेचैन हुआ जाता है, कुछ चैन तो पायेगा ये दिल।

Comments

21 responses to “आ के मिल”

    1. Geeta kumari

      बहुत बहुत धन्यवाद

  1. Prayag Dharmani

    बेहद खूबसूरत खयाल

    1. बहुत शुक्रिया जी 🙏

  2. Priya Choudhary

    बहुत सुंदर

    1. धन्यवाद जी

  3. बहुत सुन्दर कविता की रचना की है आपने, शानदार निखार है लेखनी में, वाह

    1. Geeta kumari

      आपकी सुंदर समीक्षा के लिए आपका बहुत सारा धन्यवाद🙏
      हौसला अफजाई के लिए शुक्रिया। अच्छी समीक्षाएं उत्साह वर्धन करती हैं।

      1. स्वागतम

    1. Geeta kumari

      सादर धन्यवाद भाई जी 🙏

  4. सुन्दर अभिव्यक्ति

    1. Geeta kumari

      धन्यवाद जी

    1. Geeta kumari

      धन्यवाद जी🙏

  5. Rishi Kumar

    आपने बड़े ही लय के साथ लिखा है

    1. Geeta kumari

      बहुत बहुत धन्यवाद आपका 🙏 अच्छी समीक्षाएं उत्साह वर्धन करती हैं।

  6. Devi Kamla

    बहुत खूब

    1. Geeta kumari

      बहुत बहुत धन्यवाद कमला जी

  7. Piyush Joshi

    बहुत ही अच्छी कविता

    1. Geeta kumari

      Thanks for your pricious complement 🙏

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