9 Comments

  1. जमाने बदल जाते हैं पर प्रथा नहीं बदलती
    जाने क्यों की थी जमाने ने यह भेदभाव की गलती
    Nice poem 👏👏

  2. दो हाथ, दो पैर के एक समान इंसान को भेदभाव की विभिन्न श्रेणियों में बांट कर हम कल्पना लोक में ही तो जी रहे हैं, आपके द्वारा वर्णनात्मक शैली में समाज के यथार्थ को सामने लाया गया है, साधुवाद है।

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