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  1. शायरी का थोड़ा सा भावार्थ समझाना चाहूंगा सबको–
    सच और झूठ एक दूसरे के विपरीत होते हैं यानि प्रतिद्वंदी।
    सच ,झूठ से नफरत करता है और झूठ ,सच से
    इसीलिए झूठ सच हो समाप्त करने के लिए कोशिश करता रहता है मगर जैसे ही झूठ लोगों के पास जा कर देखता है तो उसे भी हैरानी होती है कि लोगों की जुबान पर केवल वही है ,मतलब झूठ ही रह गया है
    सच तो है ही नहीं कही भी।
    पंक्तियों में झूठ का मानवीकरण किया गया है

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