नहीं समझने वाले बहुत हैं… (शायरी)

मैं बुरा हूं या नहीं,
मगर बनाने वाले बहुत हैं।
मैं मौन-सा बना; चुप हूं,
क्योंकि नहीं समझने वाले बहुत हैं।

Comments

11 responses to “नहीं समझने वाले बहुत हैं… (शायरी)”

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar
      मोहन सिंह मानुष

      , धन्यवाद

  1. Suman Kumari

    सुन्दर

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar
      मोहन सिंह मानुष

      धन्यवाद जी

  2. Geeta kumari

    सुन्दर

  3. Rajeev Ranjan Avatar

    बहुत अच्छा

  4. मोहन सिंह मानुष Avatar
    मोहन सिंह मानुष

    सादर आभार

  5. Pratima chaudhary

    बहुत सुंदर पंक्तियां

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