5 Comments

  1. शायद उम्र का नया सा पड़ाव हो
    या फिर बीते पल का हिसाब हो
    नहीं तो राजनीति का झुकाव हो
    वरना दमदार इंसान चुप हो ऐसे
    —– बहुत ही खूबसूरत पंक्तियाँ, बहुत ही खूबसूरत कविता। उत्तम शिल्प उत्तम भाव

  2. इतना मजबूर सा कोई हो तो कैसे
    आईने शक्ल बदले हर रोज जैसे
    __________बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति है राजीव जी,उत्तम
    शिल्प,समसामयिक यथार्थ चित्रण प्रस्तुत करती हुई बहुत सुन्दर रचना

  3. इतना मजबूर सा कोई हो तो कैसे
    आईने शक्ल बदले हर रोज जैसे
    शायद उम्र का नया सा पड़ाव हो
    या फिर बीते पल का हिसाब हो
    नहीं तो राजनीति का झुकाव हो
    वरना दमदार इंसान चुप हो ऐसे
    इतना मजबूर सा कोई हो तो कैसे..
    यथार्थपरक, समसामयिक रचना
    उत्तम लेखन

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