इत्तिफाक से हमने
गुजीता किया जब
आपके चमन को,
गिरफ्तार कर लिया तब
आपने हमारे
गुमगश्ता मन को।
अब ऐसा लगता है
इत्तमाम पा लिया है,
आप हैं तो जीने का
इंतजाम पा लिया है।
इत्तमाम पा लिया है
Comments
14 responses to “इत्तमाम पा लिया है”
-

बहुत ही बढ़िया
-
Thank you ji
-
-
अतिसुंदर भाव
-
सादर आभार
-
-
बहुत सुंदर रचना है… हृदय के भावों की ख़ूबसूरत अभिव्यक्ति ।
आप है तो जीने का इंतजाम पा लिया है।… बहुत ख़ूबसूरत पंक्तियां, लाजवाब, काबिले तारीफ़ ।-
भावों की गहराई तक पकड़ बनाने और बेहतरीन समीक्षा हेतु हार्दिक धन्यवाद और अभिवादन। यह उत्साहवर्धन यूँ ही बना रहे।
-
-

बहुत ही शानदार, धारदार
-
Thank you जी
-
-
काबिले तारीफ कविता
-
बहुत बहुत धन्यवाद
-
-

अतिसुन्दर पाण्डेय जी
-
Thank you ji
-
-

बहुत ही सुंदर
-
बहुत बहुत धन्यवाद जी
-
Leave a Reply
You must be logged in to post a comment.