चटपटी स्वाद की इमली
व कड़वा होता नीम यहाँ।
मूँह में पानी आ जाते हैं
देख इमली जहाँ -तहाँ।।
बिन खाए सांसों से केवल
स्वास्थ्यलाभ दे नीम हमेशा।
‘विनयचंद ‘ ऐसे हीं संतन
हरे सकल जग जीव कलेशा।।
इमली बनाम नीम
Comments
3 responses to “इमली बनाम नीम”
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😁😁
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Good
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वाह
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