ऑक्सीजन की कमी हुई है देश में,
मार रही है बीमारी, कोरोना के भेष में।
प्रदूषित होती जा रही है धरा,
वृक्ष लगाकर आओ बनाऍं इसको हरा।
ऑक्सीजन के सिलेंडर लेते हो,
तुम कुछ दाम देकर।
फल भी खाओ ऑक्सीजन पाओ,
मात्र कुछ वृक्ष लगाकर।
प्रकृति हमें कितना देती है,
अब इसका दोहन बन्द करो।
कराह रही है धरती माता,
इतना तुम मत गन्द करो।
स्वच्छ करनी है वसुंधरा,
यह वादा निभाऍंगे।
स्वच्छता की रौशनी में,
धरा को जगमगाऍंगे।
बन्द करेंगे प्लास्टिक का उपयोग,
धरा पर वृक्ष लगाऍंगे।
वादा है इस तरह हम,
पृथ्वी दिवस मनाऍंगे॥
____✍गीता
इस तरह हम पृथ्वी दिवस मनाऍंगे
Comments
5 responses to “इस तरह हम पृथ्वी दिवस मनाऍंगे”
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Jarur Geeta jee, aapke lagaye pedon ke oxygen mujhe bhi lena hai.
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जरुर राजीव जी, आपकी एडवांस बुकिंग हो चुकी है।…समीक्षा हेतु बहुत-बहुत धन्यवाद सर🙏
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बन्द करेंगे प्लास्टिक का उपयोग,
धरा पर वृक्ष लगाऍंगे।
वादा है इस तरह हम,
पृथ्वी दिवस मनाऍंगे॥
——- बहुत सुन्दर रचना। अति उत्तम अभिव्यक्ति-
उत्साहवर्धक समीक्षा हेतु बहुत-बहुत धन्यवाद सतीश जी
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अतिसुंदर भाव
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