उम्र आधी काट लूँगा

सुख बटाया साथ मिलकर
दुःख भी तेरा बाँट लूँगा।
उम्र आधी कट गई है
उम्र आधी काट लूँगा।।
हर कदम पर साथ देंगे
हमने खाई थी कसम।
चल चुके हम साथ मिलकर
शेष अब है दो कदम।।
विष भरी है ज़िन्दगी
तो खुशी से चाट लूँगा।
सुख बटाया साथ मिलकर
दुख भी तेरा बाँट लूँगा।।
उम्र आधी कट गई है
उम्र आधी काट लूँगा।।

Comments

11 responses to “उम्र आधी काट लूँगा”

  1. Geeta kumari

    सुंदर रचना

    1. शुक्रिया बहिन

  2. Satish Pandey

    जीवन साथी के साथ सुख-दुःख में सामान भागीदारी की प्रतिबद्धता को सुन्दर शब्दों में प्रस्तुत किया है

    1. बहुत बहुत धन्यवाद व आभार
      श्रीमान् जी का

  3. Praduman Amit

    संगिनी संग हो तो जीवन के सफर यों ही कट जाती है। रचना तारीफ़ ए काबिल है।

  4. मोहन सिंह मानुष Avatar
    मोहन सिंह मानुष

    बिल्कुल! जीवन साथी के साथ सहनशील होना बहुत जरूरी है
    बेहतरीन प्रस्तुति

    1. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

      धन्यवाद मान्यवर

  5. Priya Choudhary

    बहुत सुंदर रचना sir

  6. जीवनसाथी के रिश्ते को प्रदर्शित करते हुए अति उत्तम रचना विनय जी

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