सुख बटाया साथ मिलकर
दुःख भी तेरा बाँट लूँगा।
उम्र आधी कट गई है
उम्र आधी काट लूँगा।।
हर कदम पर साथ देंगे
हमने खाई थी कसम।
चल चुके हम साथ मिलकर
शेष अब है दो कदम।।
विष भरी है ज़िन्दगी
तो खुशी से चाट लूँगा।
सुख बटाया साथ मिलकर
दुख भी तेरा बाँट लूँगा।।
उम्र आधी कट गई है
उम्र आधी काट लूँगा।।
उम्र आधी काट लूँगा
Comments
11 responses to “उम्र आधी काट लूँगा”
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सुंदर रचना
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शुक्रिया बहिन
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जीवन साथी के साथ सुख-दुःख में सामान भागीदारी की प्रतिबद्धता को सुन्दर शब्दों में प्रस्तुत किया है
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बहुत बहुत धन्यवाद व आभार
श्रीमान् जी का
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संगिनी संग हो तो जीवन के सफर यों ही कट जाती है। रचना तारीफ़ ए काबिल है।
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धन्यवाद जी
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बिल्कुल! जीवन साथी के साथ सहनशील होना बहुत जरूरी है
बेहतरीन प्रस्तुति-
धन्यवाद मान्यवर
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बहुत सुंदर रचना sir
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Bhut khub
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जीवनसाथी के रिश्ते को प्रदर्शित करते हुए अति उत्तम रचना विनय जी
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