जमाना

ना रुकेगा ये वक्त
ना जमाना बदलेगा
सुख जायगा जब पेड़
तो ये परिंदा ठिकाना बदलेगा

– हिमांशु ओझा

Comments

6 responses to “जमाना”

  1. बहुत खूब👏

  2. Satish Pandey

    कितना वक्त बीत चला, लेकिन पुरातन रूढ़ियाँ अब भी अपनी जड़ें जमाये हुए हैं, सटीक प्रहार है, बहुत खूब।

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