8 Comments

  1. हर्षित हुआ फुलवारी सा मन,
    तितली बन फिर मंडराया है।

    सरस्वती माँ की अनुकम्पा से,
    क्या लिखना हमको आया है।
    —— बहुत सुंदर पंक्तियों से सजी अनुपम रचना, वाह, अत्युत्तम भाव।

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