एक और निर्भया

बस कुछ दिन की बात है
सब भूल जाएंगे
काम – धन्धों में मशगूल हो जाएंगे
नईं कहानी का शोर मचाएंगे
फिर कोई और निर्भया होगी
जीवन की जंग हार जाएगी
कोई कुछ ना करेगा
बस इक नाम और जुड़ेगा।

Comments

22 responses to “एक और निर्भया”

  1. वाह वाह, सुंदर कविता

    1. Anu Singla

      शुक्रिया

  2. बहुत अच्छी कविता

    1. Anu Singla

      धन्यवाद

  3. फिर कोई और निर्भया होगी
    जीवन की जंग हार जाएगी
    बहुत ही यथार्थ लिखा है आपने। कुछ समय तक काफी बातें होती हैं, फिर सब चुप हो जाते हैं। यथार्थ उजागर करने वाली लेखनी को सैल्यूट

    1. Anu Singla

      शुक्रिया

  4. Geeta kumari

    “कोई कुछ ना करेगा इक नाम और जुड़ेगा”
    यथार्थ चित्रण किया है अनु जी । वास्तविक अभिव्यक्ति

    1. Anu Singla

      धन्यवाद

  5. वाह आदरणीय अनु जी कम लिखती हैं लेक़िन ठोस लिखती हैं। बहुत खूब

    1. Anu Singla

      धन्यवाद

  6. बहुत ही सच्ची बात कही आपने लोग थोड़े दिन ही किसी विषय को महत्व देते हैं बाद में सब अपने अपने रास्ते हो जाते हैं
    जब तक कानून व्यवस्था और और लोगों की सोच ,मैं बदलाव नहीं आता तब तक ऐसे ही चलता रहेगा

    1. Anu Singla

      शुक्रिया

  7. अनु जी की कविता लाजवाब है।

    1. Anu Singla

      शुक्रिया

    1. Anu Singla

      धन्यवाद

  8. Anu Singla

    धन्यवाद

  9. मोहन सिंह मानुष Avatar

    बहुत ही यथार्थ परक सुंदर रचना

    1. Anu Singla

      शुक्रिया

    1. Anu Singla

      शुक्रिया

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