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  1. जिस कुलदीपक और घर की लक्ष्मी के, खातिर मंदिरों में दिए जलाते हैं,हम नए फैशन में जलती हुई मोमबत्तीयां बुझवाते हैं,
    आधुनिक समाज में विदेशी फैशन पर कटाक्ष करती हुयी कविता,बहुत सुंदर अभिव्यक्ति

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