एक दिन

वतन फ़रामोश तेरा अंतिम घड़ी एक दिन आएगा।
तेरी चौड़ी छाती पे देखना, हमारा तिरंगा फहराएगा।।
बहुत सह लिए तेरा जुर्म एक दिन फैसला हो जाएगा।
सुभाष भगत आज़ाद की दास्तान मेरा पंजा बताएगा।।
फौलादी दिल में एक दिन देखना शोला ले लेगा जन्म । तिरंगा की कसम आज नहीं तो कल फैसला हो जाएगा।।

Comments

9 responses to “एक दिन”

  1. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

    अमितजी कविता अच्छी है।
    पर कैटेगरी गलत है।

    1. Praduman Amit

      जी,,,, समझ गया। धन्यवाद।

    1. Praduman Amit

      शुक्रिया।

  2. रचना अच्छी परंतु त्रुटियाँ हैं परंतु पंक्तिबद्धता अशुद्ध है

  3. Satish Pandey

    जय भारत

  4. देशभक्ति से ओतप्रोत कविता

Leave a Reply

New Report

Close