वतन फ़रामोश तेरा अंतिम घड़ी एक दिन आएगा।
तेरी चौड़ी छाती पे देखना, हमारा तिरंगा फहराएगा।।
बहुत सह लिए तेरा जुर्म एक दिन फैसला हो जाएगा।
सुभाष भगत आज़ाद की दास्तान मेरा पंजा बताएगा।।
फौलादी दिल में एक दिन देखना शोला ले लेगा जन्म । तिरंगा की कसम आज नहीं तो कल फैसला हो जाएगा।।
एक दिन
Comments
9 responses to “एक दिन”
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अमितजी कविता अच्छी है।
पर कैटेगरी गलत है।-

जी,,,, समझ गया। धन्यवाद।
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Very Nice
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शुक्रिया।
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Nyc
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रचना अच्छी परंतु त्रुटियाँ हैं परंतु पंक्तिबद्धता अशुद्ध है
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वाह वर्तनी जांच ले
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जय भारत
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देशभक्ति से ओतप्रोत कविता
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