सुनाती नहीं मैं अपना गम

सुनाती नहीं मैं अपना गम किसी को
तो खुशियों का इजहार करूँ कैसे,
मुश्किले है मेरी राह में बहुत
मैं अपनी मंजिल पर आगे बढूँ तो बढूँ कैसे?

Comments

8 responses to “सुनाती नहीं मैं अपना गम”

  1. Shuresh Singh Avatar

    सुंदर रचना अंजली जी

  2. अच्छी है। मुश्किलें

  3. Satish Pandey

    बहुत खूब

  4. anjali patel

    Thanks all of you

  5. सुंदर भाव

Leave a Reply

New Report

Close