5 Comments

  1. बहुत ही सुन्दर तरीके से समसामयिक प्रकरण के संदर्भ में पंक्तियाँ लिखी हैं। कवि के भीतर की संवेदना बाहर छलक पड़ी है। लेखनी को प्रणाम

  2. बहुत ही अच्छी ।
    नर हो या नारी दोनों भर्त्सना के अधिकारी हैं
    कदम-दर-कदम बढ़ाने से पहले, जरूरी थोड़ी-सी तैयारी है

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