एक परदेशी ने तुम पर भरोसा किया

एक परदेशी ने तुम पर भरोसा किया।
तुम कपटी हुई , उससे धोखा किया ।।
नारी तो होती है ममता की मूरत।
क्या तुझको नहीं थी उसकी जरुरत।।
ज़िन्दगी के बदले मौत का तोफा दिया।
एक परदेशी ने तुम पर भरोसा किया।।
अमर सुधा रस का तुम में है वास।
फिर क्योंकर जहर को बनाया रे खास।।
मित्र भी गए मित्रता भी गई
पाक रिश्ते को तूने बदनाम कर दिया।।
एक परदेशी ने तुम पर भरोसा किया।

Comments

5 responses to “एक परदेशी ने तुम पर भरोसा किया”

  1. Satish Pandey

    बहुत ही सुन्दर तरीके से समसामयिक प्रकरण के संदर्भ में पंक्तियाँ लिखी हैं। कवि के भीतर की संवेदना बाहर छलक पड़ी है। लेखनी को प्रणाम

  2. बहुत ही अच्छी ।
    नर हो या नारी दोनों भर्त्सना के अधिकारी हैं
    कदम-दर-कदम बढ़ाने से पहले, जरूरी थोड़ी-सी तैयारी है

  3. Geeta kumari

    ज़िन्दगी की कुछ कड़वी सच्चाइयों को बयां करती हुई, हृदय – स्पर्शी रचना।

  4. बहुत सुन्दर

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