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  1. माटी के दीपक से जीवन की बहुत सुन्दर तरीके से तुलना की है कवयित्री प्रज्ञा जी ने अपनी इस कविता में । सुन्दर शिल्प और सुंदर भवाभिव्यक्ति

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