एक ही मुस्कान पर

आज भी हम तुम्हारी
एक ही मुस्कान पर,
सैकड़ों शायरी बना सकते हैं
तुम मुस्कान तो दो।
आज भी शब्दों के फूलों को
बिछाकर राह में
स्वागत करेंगे, तुम, हमें
आने का कुछ पैगाम तो दो।

Comments

14 responses to “एक ही मुस्कान पर”

  1. वाह! बहुत खूब

    1. बहुत बहुत धन्यवाद

  2. गजब का लिखते हो सर

    1. बहुत सारा धन्यवाद

  3. सुन्दर प्रस्तुति

    1. सादर धन्यवाद जी

  4. This comment is currently unavailable

  5. Geeta kumari

    Very beautiful way of expressing the feeling of heart
    …… Greetings to your pen…..

    1. आपकी इस सुंदर टिप्पणी और समीक्षा के लिए बहुत बहुत धन्यवाद है। आपके शब्दों में असीम क्षमता है। सदैव बनी रहे, अभिवादन

  6. बहुत बढ़िया

    1. धन्यवाद जी

    1. सादर धन्यवाद शास्त्री जी

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