ए वक्त बात बता क्या थी

ए वक्त तू गवाह है मेरा,
तू बात, बता क्या थी
हम बिछड़ गए, मेरी खता क्या थी
हजारों बंदिशें भी थीं,हजारों मिन्नतें भी की
समझा ना ये ज़माना ,ये बात पता क्या थी
वो माने नहीं, मेरी दलीलों को कभी,
इससे बड़ी सज़ा क्या थी
ना सोचा था, ना समझा था कभी ,
कि ऊपर वाले की रजा क्या थी

Comments

10 responses to “ए वक्त बात बता क्या थी”

  1. Vasundra singh Avatar
    Vasundra singh

    आपके शब्दों से प्रेरित

    न बंदिशें रोक पायी तुझे
    न मिन्नतों का असर हुआ तुझ पर
    ए दिल बता आखिर
    जहां ए इश्क में ऐसा किया दिखा

  2. Geeta kumari

    😊🙏…Thank you

  3. मोहन सिंह मानुष Avatar
    मोहन सिंह मानुष

    बहुत ही लाजवाब व बेहतरीन प्रस्तुति

    1. Geeta kumari

      धन्यवाद 🙏

  4. Satish Pandey

    श्रृंगार के वियोग पक्ष का सुंदर वर्णन है, अरबी फ़ारसी शब्दों का प्रयोग सुंदर तरीके से हुआ है. वाह

  5. Geeta kumari

    बहुत बहुत धन्यवाद सतीश जी 🙏

  6. Devi Kamla

    सोचा था, ना समझा था कभी
    Nice

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