10 Comments

  1. अतिसुंदर हृदयक भाव
    उदारवाद की चासनी चढ़ी एकदम खाजा मिठाई सी
    सरल सीधी एवं मीठी कविता।
    पाण्डेयजी की वाणी। हृदय में समानी।

    1. वाह शास्त्री जी, आपकी ओर से यह मिठास भरी समीक्षा पाकर अत्यंत हर्षानुभूति हो रही है। सादर धन्यवाद

  2. बहुत ही सरस काव्य है सर ,कौन सी पंक्तियां हाई लाइट करूं ,दुविधा में आ गई हूं ।सारी की सारी कविता मीठी वाणी से सराबोर है । कविता के शीर्षक के अनुसार ही मिठास फैलाती हुई बहुत ही शानदार रचना ।
    लेखनी से अनुपम साहित्य प्रस्फुटित हुआ है ।

    1. इस उत्साहवर्धक और प्रेरणादायी समीक्षा हेतु धन्यवाद शब्द भी कम है। आपकी इसी बेहतरीन समीक्षा शक्ति के अनुरूप ही आप सर्वश्रेष्ठ आलोचक सम्मान से विभूषित हैं। सादर अभिवादन आदरणीया

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