ऐ काश! कोई तो होता…

ऐ काश! कोई तो होता
जो बांहों में ले लेता
कहता मुझसे दो बातें
सबकुछ मेरा ले लेता
मुझ बिन ना कटती रातें
मुझ बिन ना सवेरा होता..
कभी रोती तो रोने ना देता
सारे आँसू पी लेता
जब हँसती तो खुश होता
जब रोती तो रो लेता..
ना करता परवाह जहान की
मेरे पीछे पागल रहता..
मुझे करता प्यार टूटकर
बर्बाद मुझे कर देता..

Comments

2 responses to “ऐ काश! कोई तो होता…”

  1. Praduman Amit

    वाह । एक प्यासे दिल की दास्तां सुनाती है आपकी प्रेम भरी कविता।

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