बहक ना जाएं कहीं कदम हमारे
डरते हैं इसी बात से हम
क्योंकि गुजरते हैं हर रोज
हम भी मैखानें के करीब से।
वीरेंद्र सेन प्रयागराज
डर
Comments
6 responses to “डर”
-
सुंदर
-

आभार
-
-
अति उत्तम, क्या बात है
-

आभार
-
-

वाह
-

धन्यवाद
-
Leave a Reply
You must be logged in to post a comment.