ऐ चाँद ,तुम जल्दी आ जाना

आज ,अखण्ड सौभाग्यवती का

माँ उमा से है वर पाना

ऐ चाँद, तुम जल्दी आ जाना ||

आज पिया के लिये है सजना संवरना

अमर रहे सदा मेरा सजना

ऐसा वर तुम देते जाना

ऐ चाँद ,तुम जल्दी आ जाना ||

अहसानों के बोझ तले

मुझे मत दबाना

आज आरजू है यही

इबादत में मोहब्बत का विस्तार कराना

रहे सदा साथ सजना का

ऐसा वर तुम देते जाना

ऐ चाँद ,तुम जल्दी आ जाना ||

पिया ही तो है मेरा गहना

उसके लिए है ,आज गजरे को पहना

मेरे गजरे को , है चांदनी से नहलाना

ऐ चाँद ,तुम जल्दी आ जाना ||

तू है नटखट बड़ा

न मुझे तू सताना

बादलों के पर्दों में

कहीं छिप न जाना

चलेगा न तेरा ,अब कोई बहाना

ऐ चाँद ,तुम जल्दी आ जाना ||

दिखाऊंगी तुझे ,कैसा पहना है कंगना

पीली सरसों सा दमकता मेरा गहना

गीत सौभाग्य का तुम ऐसा गुनगुनाना

जीवन की बगिया में मृदुल सुख महकाना

प्राण उपवन खिला कर ,मत मुरझाना

नित्य मधुमास जीवन में,आज कलियाँ खिलाना

ऐ चाँद ,तुम जल्दी आ जाना ||

Comments

5 responses to “ऐ चाँद ,तुम जल्दी आ जाना”

  1. बहुत सुंदर

  2. आपकी यह रचना उच्चकोटि की है

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