ओ रे कृष्णा

ओ रे कृष्णा
काहे सताये मोहे
पनघट पर पनिया भरत में
काहे छेड़े मोहे
मटकी फ़ोड़े
राहे रोके
निस दिन बरबस ही
आके टोके
जरा भी लाज शरम
न आये तोहे
ओ रे कृष्णा
काहे सताये मोहे

Comments

2 responses to “ओ रे कृष्णा”

  1. महेश गुप्ता जौनपुरी Avatar
    महेश गुप्ता जौनपुरी

    वाह बहुत सुंदर

Leave a Reply

New Report

Close