10 Comments

  1. बड़े सुन्दर भाव प्रगट है
    ———-✍
    अब भी कचरा उठा रही हो,
    हाथों से नहीं कलम से,
    भारत की भ्रष्टाचार मिटा रही हो,
    बदमाशों की औकात बता रही हो
    चाहे हाथरस की घटना या आरक्षण हो,
    कलम से कचरा उठा रही हो🤔🙂

  2. यह तो बड़ी हास्यास्पद कविता हो गए आपने बिल्कुल सत्य कहा जिस प्रकार सुबह-सुबह किन्ही कारणों से आंख खुल जाते हैं और उनिदी आंखों से उठना पड़ता है Tu Hriday mein kuch ISI Prakar ki भावनाएं उठती है कचरा पार्टी के ऊपर बहुत ही अच्छी रचना और जैसा कि ऋषि जी ने कहा कि आपने कलम के द्वारा समाज में फैली अराजकता सांप्रदायिकता तथा संवेदनशील मुद्दों पर कविताएं लिखकर समाज का दृष्टिकोण बदलने का कार्य कर रही हैं वह भी कचरा उठाने से कम नहीं है

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